गुरुवार, 1 जनवरी 2015

नये भारत के निर्माण में जागृति यात्रा की भूमिका

नये भारत के निर्माण में जागृति यात्रा की भूमिका - अंचल ओझा

कहा जाता है की सपनों की दुनिया नहीं होती, जो लोग अँधेरी रात को नींद में सपने देखते हैं उनके सपने कभी पुरे नहीं होते। किसी ने ठीक ही कहा है की ऐसे सपनों को हकीकत में बदलो जो की रात के अंधेरों में नींद में नहीं बल्कि जागती आंखों में देखों जो की उन्हें कुछ करने को प्रेरित करती हैं। जागृती यात्रा के दौरान युवा ऐसे ही सपनों की और बढ़ रहे हैं जो की उन्हें सोने नहीं देगा। 24 दिसम्बर से शुरू हुई यह यात्रा अब धिरे-धिरे उस और बढ़ गई है, जिसने युवाओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है की कैसे करोड़ों की भीड़ में अपनी राह तय करें और अपनी जगह पक्की करें। यूं तो ऐसे भी जागृति यात्रा में हजारों रजिस्ट्रेशन के बिच से कुछ लोगों का चयन ही यह बताने को काफी है की जो जागृति यात्रा के हिस्सा बने हैं, वे कहीं न कहीं उन हजारों से बिल्कुल अलग और कुछ अलग करने वाले हैं तभी हजारों की भीड़ से निकल कर सैकड़ो में अपनी जगह बना पाये  हैं। भले ही जागृति यात्रा का यह आयोजन श्री शशांक मणी त्रिपाठी के अपनी सोच, सपने और देश के लिये कुछ करने की चाहत का नतीजा हो, लेकिन सच तो यह है की आज यह भारतीय युवाओं का सपना बन चूका है। आज भारतीय युवाओं की प्राथमिकता के रूप में यह यात्रा जुड़ चुकी है। यात्रा पर आये युवाओं से जब इस यात्रा पर आने के उददेश्य पर चर्चा हुई तो उन्होंने बताया की बेशक यात्रा पर आयें बहुत से युवा कहीं न कहीं जॉब कर रहे हैं, कुछ खुद का रोजगार स्थापित कर चुके हैं। किन्तु फिर भी युवाओं की सोच है की क्या हम जो कर रहे हैं वह सही है या नहीं। युवाओं का कहना है की इस यात्रा पर आने से हम अपने आप सही तरीके से आंक सकते हैं की हमारा वर्तमान कितना सही है और कितना गलत। यहां पर सैकड़ों युवाओं की अपनी अलग-अलग सोच है, सभी अपने अपने तरीके से बदलाव लाना चाहते हैं, रोल मॉडल से मुलाकात और उनकी सफलता की कहानी हम युवाओं को नये जोश के साथ, नई रणनीति से आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है।
       हम में से सभी कहीं न कहीं यात्रा हमेशा करते हैं, किन्तु ऐसी यात्रा जहां 450 युवा, 10 से अधिक रोल मॉडल, 50 से अधिक टीम के लोग, 15 दिन का कार्यक्रम और 8000 किमी. की रेल यात्रा ऐसी यात्रा विश्व में शायद ही कही होती होगी। देश की जनसँख्या जिस गति से बढ़ रही है और युवाओं की संख्या जिस अनुपात में है, वह साफ़ दर्शाता है की युवाओं के मजबूत कन्धों पर देश का वर्तमान और भविष्य दोनों टिका है। ऐसे में जागृति यात्रा का यह आयोजन देश के वर्तमान और भविष्य के निर्माण में मिल का पत्थर साबित होगा यह कहा जाये तो शायद अतिशयोक्ति नही होगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुँचा युवाओं का विशाल जनसमूह, सबके अपने विचार और  अपनी पहचान, यह उस भारत की परिकल्पना है जो की आने वाले कुछ वर्षों में विश्व् पटल पर सुपर पॉवर के हैसियत से खड़ा होगा और उस सुपर पॉवर भारत के हिस्से में  जागृति यात्रा के उन युवाओं का भी बडा योगदान होगा जो की अपने मजबूत इरादों के बल पर देश में बदलाव् लाने गर्मी, बरसात और ठण्डी में 8000किमी. की ट्रेन यात्रा पर हैं। रोजाना ही यात्रा पर होने वाले विशेष् चर्चा और जागृति द्वारा कराये जा रहे सर्वे से जो परिणाम सामने आ रहे हैं, वह एक मजबूत बदलाव की और इशारा कर रहा रहा है, मसलन देश की शिक्षा निति, घूसखोरी जैसे मुद्दों पर युवाओं के उत्तर आने वाले वर्षों में देश में बदलाव की और इशारा कर रहे हैं।औरों से हटकर दो कदम आगे बढ़ने की युवा चाहतों ने इस बात को पुख्ता कर दिया है की पूर्व राष्ट्रपति मिसाईल मैन ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के ड्रीम 2025 के संकल्प व सपनों को ये युवा ही पूरा करेंगे। देश में वर्तमान में बदलाव की एक ब्यार सी चल पड़ी है चाहे वह जिस भी तरीके से शुरू हुई हो। बदलाव लोकसभा से लेकर विधानसभाओं तक देखने को मिले हैं। भले ही नई सरकर जन अपेक्षाओं पर अब तक खरी नहीं उतर पायी हो, किन्तु सच तो यह है की सरकार की कुछ नीतियों ने नागरिकों खासकर युवाओं की मानसिकता को बदलने की एक अच्छी शुरुवात की है। जागृति यात्रा के इन 7 दिनों में जो सबसे बड़ी बात मैंने नोट किया वह यह था की स्वछता के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के नारों ने युवाओं में एक सकारात्मक सोच विकसित किया है। यात्रा के दौरान मैंने यह देखा की स्वछता को लेकर युवाओं की मानसिकता बदल गई है, युवाओं का कहना है भले ही हम सड़क की नालियां व सड़क साफ़ न करें किन्तु अपने आस पास की जगह जिसका हम उपयोग करते हैं वह बिल्कुल साफ़ होना चाहिए। मैंने यह देखा की ट्रेन व अन्य स्थानों पर युवा पानी पीकर, चाय व कॉफी पीकर, नास्ता करके यूँ ही ग्लास, कप और प्लेट फेंकता नहीं, उसे डस्टबिन में डालता है अथवा उसे साथ में रख लेता है और सही स्थान पर उसे डालता है। यह इस बात का प्रमाण है की लोगों की मानसिकता बदल रही है और जिनकी अब तक नहीं बदली थी, उसे जागृति यात्रा बदल रही है। जागृति यात्रा में आपस में बैठ कर युवाओं द्वारा व्यापार व रोजगार के ले नये-नये आईडिया बनाना और उस पर मिल कर काम करना नये भारत के निर्माण के लिये मिल का पत्थर साबित होगा। यात्रा से जो बात निकल कर सामने आ रही है, वह यह दर्शाता है की आने वाले समय में यात्रा पर आये पुरे युवा नहीं भी तो कम से कम कुछेक नये व्यापार व रोजगार के शुरुवात के लिये जागृति यात्रा आधार बनेगी।इस यात्रा के लिये धन्यवाद शशांक और पूरी जागृति की टीम।यह दर्शाता है की आने वाले समय में यात्रा पर आये पुरे युवा नहीं भी तो कम से कम कुछेक नये व्यापार व रोजगार के शुरुवात के लिये जागृति यात्रा आधार बनेगी।इस यात्रा के लिये धन्यवाद शशांक और पूरी जागृति की टीम।

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